Wednesday, 26 November 2014

#ग्रामीण भारत और #ई-कामर्स की प्रासंगिकता

 ई-कॉमर्स आधुनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। वैश्वीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी की प्रगति के प्रतीक के रूप में, यह इस डिजिटल दुनिया में सफलता की अत्याधुनिकता  का प्रतिनिधित्व करता है। 68  फीसदी से अधिक लोग, जो ग्रामीण हैं, इनकी  भागीदारी से ई-कॉमर्स से संबंधित उद्योगों का विश्वास और प्रगति प्रभावित हो सकता है। भारतीय ई-कॉमर्स का स्थिति
अन्तराल बहुत है जितने  ऑनलाइन खुदरा विक्रेता अभी तक हैं. प्रमुख भारतीय पोर्टल साइटों को भी विज्ञापन राजस्व के आधार पर करने के बजाय ई-कॉमर्स की दिशा में स्थानांतरित कर दिया है।

भारत ने प्रौद्योगिकी और ई-कॉमर्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि की है. ऑनलाइन बाजार के माध्यम से  आज ट्रेवल्स, सिनेमा, होटल आरक्षण, वैवाहिक सेवा, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, फैशन के सामान और किराने का सामान से लेकर विभिन्न वस्तुओं और सेवा ग्राहकों को उपलब्ध कराइ जा रही है. ई-बे(e-bay) की 2011 गणना के अनुसार, भारत में 3311ई-कॉमर्स हब, 1267 ग्रामीण हब, 391निर्यात हब और 2217 आयात  हब हैं. इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स से तात्पर्य कंप्यूटर नेटवर्क के माद्यम से बिज़नस करना है.

भारत में ई-कॉमर्स प्रदाता

ई-कॉमर्स वेबसाइट में सूचना निर्देशिका उत्पाद और उप शीर्षकों के साथ प्रदान की जाती हैं। जिससे ग्राहकों को जरूरत की वास्तु खोजने के लिए ज्यादा प्रयास न करना पड़े और उपभोक्ता के लिए यह आसान भी रहे. सम्बद्ध सेवाओं को भी संदेश बोर्ड, उपभोक्ता चैट रूम, उत्पादों की समीक्षा आदि के साथ प्रदान की जाती हैं. ऑनलाइन खरीदारी में डिलीवरी पर नकद भुगतान प्रणाली का उपयोग होता है , लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भुगतान इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग या डेबिट कार्ड के माध्यम से किया जाता है। क्रेडिट कार्ड सुविधाएं अभी भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं हैं।

भारत में ई-कॉमर्स की स्थिति

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन (IAMAI) और आईएमआरबी इंटरनेशनल द्वारा भारत के जारी भारतीय ई-कॉमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल ऑनलाइन लेनदेन वर्ष 2006-07 में 7080 करोड़ रुपये और वर्ष 2007-2008 में 30 फीसदी बढ़त के साथ लगभग 9210 करोड़ रुपए था। भारत में होम इंटरनेट के उपयोग में 19 फीसदी की वृद्धि हुई है। अब यह 30,320,000 बन गया है और ई-मार्केटर यह मानते हैं की 2011 तक भारत में 71 मिलियन कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं होंगे. अगर प्रभावी ढंग एवं कुशलता से ई-कॉमर्स से लोगो का परिचय हो सका तो यह एक विकासशील देश के लिए वैश्विक मान्यता के साथ उत्पादन बढ़ाकर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ ले सकता है।
प्रमुख भारतीय पोर्टल साईटें को भी विज्ञापन राजस्व के बजाय ई-कॉमर्स की दिशा में स्थानांतरित कर दी गईं है। कई साईट अब फूल, ग्रीटिंग कार्ड और फिल्म टिकट से लेकर किराने का सामान तक,  इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर इत्यादि उत्पादों और सेवाओं की विविध रेंज बेच रहे हैं। शेयर बाजार के  ऑनलाइन होने से भारत में ई-कॉमर्स के वास्तविक स्थिति का प्रारंभ हो गया। हालाँकि भारत में ई-कॉमर्स साइटों को कई परेशानिया पेश हो रहीं हैं। अपेक्षाकृत बहुत कम क्रेडिट कार्ड धारक और एकरूपी  ऋण एजेंसियों की कमी के कारण भारत में अज्ञात भुगतान की चुनौतियों को पैदा करती हैं। कोरियर और डाक सेवाओं से उपभोक्ता को माल की डिलिवरी छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत विश्वसनीय नहीं है। हालांकि, कई भारतीय बैंकों ने इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा दे रखी है पर लोग यह सुविधा शुरू करवाने से डरते हैं। स्पीड पोस्ट और कूरियर प्रणाली को भी हाल के वर्षों में काफी सुधार हुआ है।

ई-वाणिज्य के लाभ

ई-कॉमर्स कम कीमत पर माल की उपलब्धता, व्यापक विकल्प और समय की बचत को प्रदान करते हुए  उपभोक्ताओं को कई लाभ  प्रदान करता है। लोग अपने घर या कार्यालय से बाहर निकले बिना माउस बटन के एक क्लिक के साथ माल खरीद सकते हैं। ऑनलाइन सेवाए जैसे बैंकिंग, बिल भुगतान, होटल बुकिंग, टिकट (एयरलाइनों, बस, रेल सहित) की शुरुवात ग्राहकों को जबरदस्त लाभ पहुँचाने के लिए किया गया है। भारतीय ई-कॉमर्स सेवाओं एवं उत्पादों की विभिन्न प्रकार एवं किस्मे जैसे पुरुषों और महिलाओं के लिए विभिन्न परिधान, स्वास्थ्य और सौंदर्य उत्पाद, पुस्तकों और पत्रिकाएँ, कंप्यूटर और उसके सह-उत्पाद , वाहन, सॉफ्टवेयर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरणों, गहने, ऑडियो और वीडियो, मनोरंजन, सामान, उपहार, लेख, अचल संपत्ति और सेवाएं प्रदहं करते हैं.

ई-वाणिज्य में चुनौतियां

ई-कॉमर्स से व्यापार में कुछ बाधाएं हैं जिनसे कंपनियों को जागरूक होना चाहिए और ई-कॉमर्स का उपयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए की सभी महत्तवपूर्ण पहलू का पालन किया जाय नहीं तो लाभ के बजाय यह घाटे का सोदा भी बन सकता है. जैसे –इन्टरनेट सुरक्षा जहाँ सभी देशों के लिए सिरदर्द बना हुआ है वहीँ कौसल की कमी से भी यह सेक्टर जूझ रहा है इसके अतिरिक्त ग्राहकों का विश्वास और ई-कॉमर्स की जानकारी न होना, एक अंजाना डर से ई-कॉमर्स प्रदाता जूझ रहे हैं. इस समूह  के विकास के रुझान को जानने के लिए इंटरनेट सेवा के लिए मांग की कमी को ध्यान में रखना चाहिए।
ई-कॉमर्स प्रणाली को ग्राहक के हितों की रक्षा करने के लिए विश्वसनीय होना बाकी है, सुरक्षित भुगतान व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता की रक्षा करने के लिए लागू किया जाना चाहिए। विदेशी उत्पादों, के लिए आयात शुल्क और टैक्स लगाने की स्थिति में आसानी और लचीलापन न होने के कारण आर्थिक गतिविधियों के  प्रवाह नहीं है, देश और उत्पाद के अनुषार टैक्स स्कीम है. स्क्रीन के माध्यम से देखे  गए उत्पाद से एक ग्राहक की वास्तविक अपेक्षा अलग हो सकती  है। इसीलिए आजकल Myntra जैसे ई-कॉमर्स फुटकर विक्रेता बिक्री के परीक्षण की सुविधा के लिए विकल्प दे रहे हैं।

भारत में ई-कॉमर्स की भविष्य

भारत में ई-कॉमर्स देश भर में तेजी से बढ़ा है। यह विकास यात्रा और खुदरा दोनों में ज्यादातर है। भारत दुनिया की 11 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यह भी विश्व बाजार में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरा है । भारत में ई-कॉमर्स बाजार तेजी से विकास के लिए अग्रसर है।  एशिया प्रशांत Technographics ऑनलाइन सर्वेक्षण 2011 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ई-कॉमर्स राजस्व 2016 तक पांच गुना बढ़ जायेगा यह 2012 के $ 1.6 अरब के स्थान पर 2016 में  $ 8.8 अरब तक पहुँच जायेगा. अग्रणी वैश्विक अनुसंधान और सलाहकार फर्म, फोरेस्टर, द्वारा जरी  एक नवीनतम शोध के अनुसार, भारत में ई-कॉमर्स बाजार 2012-2016 में 57% से अधिक की सीएजीआर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के भीतर सबसे तेजी से विकसित होने जा रहा है। अपने कुछ खास विशेषताओं के कारण जैसे ‘कैश ऑन डीलिवेरी’ भुगतान प्रक्रिया और सीधे उत्पादक से आयात से उत्पाद की काफी कम कीमत  शायद आने वाले वर्षों में इस उद्योग को तेजी से विकसित करने में सहायक हों.

ई-कॉमर्स से बिक्री का रुझान

देश
बिक्री अमेरिकी अरब डॉलर में
2012
2016
भारत
1.6
8.8
ऑस्ट्रेलिया
23.2
35.4
जापान
63.9
97.6
चीन
169.4
356.1
सूत्र: फोरेस्टर

ई वाणिज्य में संभावनाएं:

एक फुटकर बिक्रेता अपने आप को ऑनलाइन वितरण के साथ अपने व्यापार को जोड़ कर भविष्य में अपने अस्तित्व को बचा सकता है। ऐसा करके, वे उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध विभिन्न चीजों के बारे में अतिरिक्त जानकारी पहुचने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक आर्डर के द्वारा हर समय उपभोक्ताओं के साथ संपर्क में हो सकता है। इसलिए, ई-कॉमर्स के लिए एक अच्छा अवसर है।
क्योंकि ई-कॉमर्स की दुनिया में थोक व्यापारी के अस्तित्व को सबसे बड़ा खतरा है क्योकि निर्माता उन्हें आसानी से किनारे करके खुद खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं के लिए अपने माल को  बेच सकते हैं। ऐसी स्थिति में वे थोक व्यापारी ई-कॉमर्स का लाभ ले सकते हैं जो विक्रेताओं के प्रतिष्ठित निर्माताओं के साथ करार कर अपने बिज़नस को ऑन लाइन कर लेते हैं।
उत्पादक व्यापार श्रृंखला में ऑन लाइन के साथ खुद को जोड़ने से अपने उत्पादों के बारे में बेहतर जानकारी देकर एवं अन्य लिंक से जुड़ कर  अपने ब्रांड की पहचान से ई-कॉमर्स के फायदे ले सकते हैं।
ई-कॉमर्स के साथ जितने अधिक लोगो का जुडाव होगा उसकी सुविधा को उपलब्ध करने के लिए इंटरनेट सुविधा या साइबर कैफे के लिए मांग भी बढ़ रही जाएगी। इसलिए, जो लोग ई-कॉमर्स से लाभ लेना चाहते हैं उनलोगों को साइबर की स्थापना से लाभ हो सकता है।
कुछ और महत्पूर्ण कारण हैं जिनसे द्वारा भारत में ई-कॉमर्स के क्षेत्र मै तेजी आ सकती हैं जैसे- प्रतिस्थापन की गारंटी, एम-कॉमर्स सेवा, स्थान आधारित सेवा, कई भुगतान विकल्प, त्वरित सेवा के लिए ऑनलाइन लेनदेन के लिए वैधानिक चालान, सही सामग्री, लदान विकल्प, टर्म और कंडीशन, पोर्टल पर दिखाए गए उत्पाद और ग्राहक को देते समय उत्पाद की गुणवत्ता का एकरूप होना, 24/7 समर्पित कस्टमर केयर सेंटर आदि.
रिटेलर्स को इलेक्ट्रॉनिक आदेश को पूरा करने के साथ-साथ सदेव उपभोक्ताओं के साथ संपर्क में होना चाहिए।

ग्रामीण भारत में ई-रिटेलिंग की प्रमुख चुनौतियां

·         ई-रिटेलर्स की अनुपस्थिति। ई खुदरा विक्रेताओं का परिचालन केवल बड़े शहरों के क्षेत्र में सीमित है और उन्होंने ग्रामीण भारत के लिए अपनी आँखें मुंदी हुई है।
·         परिवहन कनेक्टिविटी की कमी और कूरियर सेवाओं की अनुपलब्धता।   सड़क कनेक्टिविटी की कमी जिससे कई ग्रामीण क्षेत्रों आज भी शहरों से काटे हुए हैं जिससे ये लोग सड़कों शहरों तक पहुंचने के लिए नहर किनारों, खेतों की मेड़ो आदि का प्रयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ क्षेत्रों में अभी भी लोग  मध्यम परिवहन के रूप में ऐतिहासिक बेलगाडी का उपयोग कर रहे हैं। जिससे ई-रिटेलर्स को उन क्षेत्रों को कवर करना बहुत ही कठिन होगा। लेकिन कुछ ग्रामीण क्षेत्र शहरों के साथ सड़क संपर्क से  भाग्यशाली रूप से जुड़े हुए हैं और इनको ई- प्रयोजनों के लिए कवर करना आसान है।
  •          ग्रामीण भारत में इंटरनेट का उपयोग की अनुपलब्धता और ई-साक्षरता की कम दर।  कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता योजनाओं को अब कवर किया जा रहा है ऐसे क्षेत्रों में ई-साक्षरता की पहल पहुंचने में काफी वक्त लग सकता है।   फिर भी ऐसे क्षेत्र जो शहरी क्षेत्रों के पास हैं उन ग्रामीण क्षेत्रों में ई-साक्षरता दर और इंटरनेट का उपयोग दर अच्छी है इसलिए जैसे क्षेत्रों में  ई-रिटेलर्स को निवेश करने के लिए अच्छा अवसर है।
  •          ऑनलाइन खरीदने में वस्तु को छू कर नहीं देखा जा सकता यह भी एक चुनौती है.
  •          असामयिक या उत्पादों का डिलीवरी नहीं- कूरियर सेवाओं और परिवहन कवरेज की कमी के कारण के कारण जहां ई-रिटेलिंग उपलब्ध है वहां  उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राहकों तक पहुँचने के लिए बहुत समय ले रहा है (जबकि ये शहरी क्षेत्रों से सटे हैं)।- ग्रामीण भारत में खरीदार और विक्रेता के बीच विश्वास भी ई-रिटेलिंग के लिए एक चुनौती है।
  •          ग्रामीण उपभोक्ताओं की धारणा है की ई-रिटेलर्स घटिया गुणवत्ता और कम मात्रा के साथ उन्हे धोका दे रहे हैं यदि पुरे ग्रामीण अंचल में किसी के प्रोडक्ट में कोई खराबी आ जाये तो उनका विश्वास लगभग ख़त्म हो जाता है. दूसरी ओर ई-कॉमर्स में यह भी अनुभव किया जा रहा है की लोग समय पर वितरण को उस समय नकदी की अनुपलब्धता के आधार पर उत्पाद लेने से इनकार कर देते हैं।
  •          बैंकिंग गोपनीय जानकारी के रिसाव का खतरा- रिसाव जोखिम से बचने के लिए, ग्रामीण उपभोक्ता ऑनलाइन भुगतान के विकल्प का उपयोग करने में बहुत रूढ़िवादी हैं।
  •          भारत की सुरक्षा प्रणाली- जम्मू और कश्मीर जैसे कुछ क्षेत्रों में केन्द्र सरकार द्वारा सुरक्षा कारणों की वजह से पिछले तीन सालों से दूरसंचार की बहुत फायदेमंद एसएमएस सेवा का उपयोग प्रतिबंधित कर रखा है जबकि एसएमएस सेवा उपभोक्ताओं के लिए जानकारी प्रदान करने के लिए ई-रिटेलिंग का अभिन्न अंग है।
  •          - खरीदार और विक्रेता के बीच भाषा बैरियर- आम तौर पर ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल्स अंग्रेजी भाषा में काम कर रहे हैं, लेकिन 30% शिक्षित ग्रामीण उपभोक्ता लगभग  पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा को समझने में असमर्थ हैं।
  •          ई-रिटेलिंग के बारे में जानकारी का आभाव- ई खुदरा विक्रेताओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में कोई जागरूकता अभियान नहीं चल रहा है अतः ग्रामीण क्षेत्र के लोग  ऑनलाइन शॉपिंग पैटर्न से बहुत दूर हैं।
  •          ग्रामीण भारत में बैंकिंग क्षेत्र का अभाव- अधिकांश भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी व्यावसायिक या सहकारी बैंक नहीं है। तो शॉपिंग पोर्टल्स, जहाँ केवल ऑनलाइन भुगतान विकल्प है बिना नेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड न होने के कारण उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
  •          बदलने के लिए तैयार नहीं - ग्रामीण उपभोक्ता आसानी से खरीदारी की ऑनलाइन पैटर्न को शिफ्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं। वह पुराने पैटर्न पर ही चलना चाहते है.
  •          ग्राहक वरीयता-ग्रामीण उपभोक्ता आम तौर पर अपने जातीय डिजाइन और शैलियों को पसंद करते हैं; जो ऑनलाइन दुकानों पर आम तौर पर उपलब्ध नहीं हैं।

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सुझाव और निष्कर्ष
  •          ग्रामीण युवाओं को शिक्षित करना जिससे वे ई-रिटेलिंग के क्षेत्र में रुचि दिखाए और  प्रोक्ताओं को  अच्छा निवेश के अवसर के रूप में इनकी गिनती करना चाहिए।
  •          राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को ग्रामीण भारत में ई-रिटेलिंग में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  •          दोनों निजी और सार्वजनिक बैंकों को ई-रिटेलिंग के लिए आगे आना चाहिए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सफल वित्तीय समावेशन को समायोजित किया जा सके।
  •          ई खुदरा विक्रेताओं को  ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन के लिए बड़े पैमाने पर प्रभावी विज्ञापन (परंपरागत) शुरू करने के लिए आगे आना चाहिए।  जिससे ग्रामीण भारत में ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके और उनके अन्दर की झिझक को ख़त्म कर उन्हें इसकी आदत डाली जा सके.
  •          इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को कम कीमतों पर बड़े पैमाने पर  ग्रामीण भारत को सेवा प्रदान करने की जरूरत है।
  •          सरकार ई-साक्षरता कार्यक्रमों के जरिये ग्रामीण भारत में ऑनलाइन शॉपिंग पैटर्न को बढ़ावा देने में अपना योगदान कर सकती है एवं उन निवेशको को जो ग्रामीण उपभोक्ताओं को सेवा कर रहे हैं, को कर सम्बन्धी रियायत दे सकती है।
  •          ई खुदरा विक्रेताओं को ग्रामीण भारत में पारंपरिक खरीदारी करने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देने के लिए सबसे अच्छी कीमत पर बेहतर उत्पादों की पेशकश करनी चाहिए।
  •          केन्द्र और राज्य सरकारों से ग्रामीण क्षेत्रों में ई-खुदरा क्षेत्र में निवेश करने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
  •          ई खुदरा विक्रेताओं ग्रामीण भारत में धार्मिक या सांस्कृतिक पहलुओं का ध्यान रखने के लिए  स्थानीय स्तर पर कार्य करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों विश्वास और संस्कृति के बारे में बहुत विशिष्ट होते हैं  ऑनलाइन किसी भी बात इसे ध्यान में रखकर चीजों को रखना चाहिए।