Tuesday, 23 December 2014

स्वच्छ भारत का स्वप्न पूरा होगा?


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आज जहाँ देखों वहीँ -रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड, अस्पताल से लेकर एमसीडी स्कूल तक, सड़क से लेकर मोहल्ले की गली तक गंदगी दिखाई पड़ती है. लोग अपना घर साफ रखना चाहते हैं और अपने कूड़े को यों ही कहीं भी जहाँ जगह पातें हैं फेक देते हैं. बाहर समूहों में जाकर लोग सफाई अभियान में हिस्सा ले रहें हैं पर उनके घर के आस-पास आज भी गन्दगी फैली हुए है. इसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है. जरूरी है की शुरुवात घर से, मोहल्ले से हो तभी वह आदर्श स्थिति होगी और तभी भारत को स्वच्छ करने का सपना पूरा होगा.
555स्वछता है बुनियादी जरूरत स्वछता इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वह वह जीवन की बुनियादी जरूरत है और उसका सम्बन्ध सेहत से है और सेहत का सम्बन्ध आर्थिक स्थिति से. अगर हम स्वस्थ रहेंगे तभी अपने कार्य-कलाप का निर्वाह कर पाएंगे और सेहत पर होने वाला खर्च भी बचा पायेंगें जिससे वह खर्च जीवन के अन्य मदों में खर्च हो सकेगा. लेकिन स्वछता दिखाने की भावना से नहीं बल्कि मन में ठानने की भावना से, संकल्प लेने की भावना से हासिल होगी. जिसके लिए धन की कम मन की ज्यादा जरूरत है. स्वछता अभियान1 माननीय नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गाँधी के सफाई अभियान को पूरा करने के लिए स्वछता अभियान की शुरुवात की है और मोदी जी के आवाहन पर लोग भारत को 2019 तक भारत को कचरा मुक्त बनाने की लिए प्रयासरत दिख रहे हैं. पूरे देश में शौचालय बनाने पर बल तथा महिलाओं व बच्चियों के लिए अलग से शौचालय निर्माण की बात की जा रही है, सड़कों पर झाड़ू लगाया जा रहा है. स्वछता अभियान को सफल बनाने की लिए सचिन तेन्दुलकर, अनिल अम्बानी, अमिताभ बच्चन, सलमान खान, प्रियंका चोपड़ा, शशि थरूर, अरविन्द केजरीवाल सरीखे लोग प्यासरत हैं और मजेदार बात यह है की अब लगभग सभी मंत्री, केन्द्रीय कर्मचारी, एनजीओ और जाग्रत लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं और सड़कों पर झाड़ू लगते दिख रहे हैं. लेकिन यह कार्य सिर्फ झाड़ू लगाकर ही पूरा होने वाला नहीं है. हमें एक कदम और बढ़ाना होगा और अपनी सोच के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की भी सोच बदलनी होगी और उन्हें सरकारी सहयोग से बनने वाले शौचालय सिर्फ बनवाने के लिए नहीं बल्कि उनका इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित करना होगा.6कैसे होगी स्वछता हासिल
1. यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है की हम कूड़ा फ़ैलाने वाली अपनी आदत बदले और इस बीमारी से मुक्ति पायें ताकि भारत स्वच्छ हो सके यदि हम ऐसा कर सके तो आधी से ज्यादा समस्या हल हो जाएगी.
2. स्वच्छ भारत अभियान के लिए सबसे महत्पूर्ण कार्य नॉन-बायोडिग्रेडेबल का निपटान करना है. जिसमें सबसे बड़ा रोड़ा प्लास्टिक व पॉलिथीन संस्कृति है. आज खाने-पीने का समान हो- दूध, दही, चाय, घी,सब्जी, आटा, चावल, दाल सब इसमें ही पैक है और यह नष्ट भी नहीं होतीं. इसके अतिरिक्त ई-वेस्ट कचरा भी इसमें शामिल है जिसमें मोबाइल, कम्प्यूटर सम्बंधित और इलेक्ट्रिकल कचरा अधिक है. इनकों सिर्फ शहर से बाहर एक स्थान पर डंप किया जा रहा है जिसके चलते वहाँ कूड़े का अम्बार लगता जा रहा है क्योंकि नगर निगम जैसी सरकारी संस्था उसका सही से निपटान करने में सक्षम नहीं है. सरकार को इनके निपटान के लिए संसाधन उपलब्ध कराने होंगे. 3. सड़क पर घुमने वाले पशुओं को पकड़ना होगा और यदि उसका मालिक है तो उस पर बड़ी पेनल्टी लगानी होगी. नदियों की स्वछता के लिए उद्योगों का अपशिष्ट, सीवर का गंदा पानी आदि ना जाने देने के लिए हमें जनांदोलन के जरिये सरकार को इस पर नियंत्रण लगाने के लिए विवश करना होगा.
4. हर शहर में फैलने वाले जैविक कचरे के डिस्पोज को खाद बनाया जाय तथा इसके साथ ही इससे भविष्य का फ्यूल बनाने की सस्ती विधि विकसित की जाए जिससे ईंधन के रूप में इसका इस्तेमाल हो सके. जेपी ग्रुप ने जैसा पंजाब के चंडीगढ़ में किया है उसे पूरे देश में, हर बड़े शहरों में लागू करना होगा जिससे शहर की सारी गंदगी नष्ट हो सके और यह सस्ता ईंधन भी उपलब्ध हो सके.3अन्य उपाय
1. सम्पूर्ण रूप से स्वच्छ भारत के लिए नैतिक बल के साथ-साथ दण्डात्मक व्यवस्था भी आवश्यक है. क्योंकि जब हम भारत में मेट्रो स्टेशन पर थूकने पर 200 रुपए के जुर्माने का बोर्ड पढ़ते है तो हम थूक आने पर भी अपनी थूक गटक जाते हैं. जो लोग सफाई को नैतिक मानकर अपनी आदत नहीं बदलते उन पर जुर्माने का प्रभावी प्रभाव पड़ेगा और उनकी आदत में खुद-बखुद सुधार आ जायेगा.
2. पॉलिथीन को बनाने, बेचने के अतिरिक्त प्रयोग करने पर जुर्माने का प्रभावी प्रबंध किया जाय. इसे माइक्रॉन के जाल में न उलझाया जाय. दिल्ली में पॉलिथीन पर प्रतिबन्ध है पर यह लगभग हर दुकान पर खुले-आम इस्तेमाल हो रही है और शासन भी इस पर चुप्पी मरे बैठा है. गुटका व तम्बाकू को सच्चे मन से प्रतिबंधित करना होगा न कि पाउच पर सांप, बिच्छू का चित्र बना कर झूठा डर पैदा करने का दिखावा या टैक्स बढ़ाने का नाटक करना होगा.
3. प्रदूषण रोकने एवं सफाई कार्य को स्कूली स्तर पर भी ले जाना होगा. बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा में इसे कोर्स में डाला जाए एवं प्रेक्टिकल मार्क्सो में जोड़ा जाए. एनएसएस, एनसीसी एवं स्काउट में इसे तवज्जो दी जाए. बच्चों व महिलाओं को बायो-डिग्रेडेबल व नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बारे में बताया जाए और दोनों कचरे को एकट्ठा करने के लिए अलग-अलग डस्टबिन घर से लेकर स्कूल, कॉलेज व सार्वजनिक स्थल पर रखे जाएं. उसका निपटान दिन में कम-से-कम दो बार किया जाए. 4. केन्द्रीय सफाईकर्मी नियुक्त करने होंगे और सफाई व्यवस्था को नगर निगम को देने से बचना होगा क्योंकि नगर निगम तो राजनीतिक अखाड़ा है और सफाई पार्षद व मेयर की राजनीति में उलझ कर रह जाती है. नगर आयुक्त एवं अन्य पर्यावरण इंजीनियर चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते. एक सक्षम सफाई की टीम बनानी होगी जिसमें एनजीओ को महत्व देना होगा, उनके कार्यो की गुणवत्ता देख उन्हें मानदेय देकर इस अभियान से जोड़ना होगा. अगर हमें थूकने वालों पर रोक लगानी है तो हर गली मुहल्ले में चालान करने वाले वॉलन्टियर्स बनाने होंगे. इस कार्य में सीनियर सिटिजन को भी जोड़ा जा सकता है. जिन्हें पुलिस प्रोटेक्शन मिलनी चाहिए और जो लोग पेनल्टी लेने वालों की बात न माने, इनकी शिकायत पर पुलिस द्वारा कार्यवाही की जाए.
स्वच्छ भारत का सपना तब तक नहीं पूरा होगा जब तक हम खुले में शौच, ट्रेनों में बायोडिग्रेडेबल टॉयलेट, उचित कूड़ा निपटान विधि के साथ-साथ सफाई कर्मियों को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ अपनी आदतों में सुधार नहीं कर लेते. इसके बिना हम चाहे जितनी भी झाड़ू लगा ले स्थिति में कोई अंतर नहीं आयेगा, क्योंकि रोग की वजह को ख़त्म किये बिना रोग का उपचार नहीं हो सकता. अगर हम यह कर सकें तो हमारा देश भी उन देशों में शुमार हो जायेगा जिसकी स्वछता की आज हम आज उपमा देते हैं.

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