Sunday, 2 August 2015

भविष्य निराशा‬

Think About India


चित्र-गूगल साभार
रासायनिक खेती के युग में
तुन कौन? ढूढते चिड़िया
देखते सपना स्वस्थ्य होने का
खा के जहर
न रहे कीट, गिद्ध
औरतों-बच्चों की संगी गौरैया
सावन में झूलते पीहर
हथ-चक्की, काड़ी के गीत
कुम्हार,कहार,भडभुजे,मुशहर,धोबी
भू-जल हुआ पीला
शिशु को अनीमिया
थकी आँखे चश्मे से झांकती
कैसे हो जिजीविषा शतवर्षीय
खेत-खलिहान, मेड़ें कब तलक
भार उठाये एक हड्डी मांस का
बैल-जोड़ी..संख्या मुहावरा संपन्न खेती का
नादीयां धुल फांकती, लुढ़कती इधर-उधर
गाँव के दरवाजे तक चला आया नगर
छीन गए तालाब-पोखरे
मयूर-कोयल, तितली-मेंढक
मिला क्या?
कंक्रीट, मन, दीवालों, को काली करती
फतफतहिया मोटर...