Monday, 7 December 2015

तमाशा मेरे आगे

Think About India
 
दुनिया की नौटंकी रोज, प्रगति का ढोंग- मेरे आगे
नारी पढ़े-बढे,चूल्हा घिसे,मॉडर्नता हंगामा- मेरे आगे
नेता मस्त,गरीब हुए पस्त, विकासे दौर - मेरे आगे
सेब सस्ता, महंगी दाल, किसान बदनाम - मेरे आगे
भोगी-योगी,योगी-भोगी,बने,अध्यात्म शिखर-मेरे आगे
बदलेगा? या बदला?जमाना, है असमंजस- मेरे आगे
रोये-बुझे दिल,चीखे आत्मा, हसती अमीरी - मेरे आगे
दूध न बीके, दारु ढूंढते लोग, मतिभ्रम हालात-मेरे आगे
थका! बैठे-बैठे,दौड़े कैसे? अहसाय इंसान- मेरे आगे
हो चूका, बहुत! घुटे दम, दमघोटू संसार –मेरे आगे